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राशिफल 2012

मेष इस साल आपका विवाह योग बन रहा है मगर ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आप पहले से शादीशुदा हैं। गणेशा कहते हैं कि इस आफत के लिए आप खुद ज़िम्मेदार हैं। टाइमपास करने के चक्कर में ऑफिस में जिस लड़की से आपने फ्लर्ट करना शुरू किया था, उसे लेकर आप अब सीरियस होने लगे हैं। आपके प्यार में वो लड़की भी इतन…ा आगे जा चुकी है कि आपका तलाक तक करवा सकती है वैसे भी वो घर उजाड़ने के मिशन पर निकली है। जब-जब आप ऑफिस में होते हैं तो बीवी को धोखा देने के लिए मन में गिल्ट होता है मगर घर पहुंचते ही बीवी की कर्कश आवाज़ सुन, आप सोचते हैं कि ये यही डिज़र्व करती है। बावजूद इसके गणेशा सलाह देंगे कि इन चक्करों में मत पड़िए। ये उम्र आपकी सैटिंग करने की नहीं, कन्यादान करने की है। ज़रा नज़र उठाकर देखिए, आपकी बेटी जवान हो गई है। सलाह-पांच शनिवार छह कौओं को शहद चटाइए, इससे आपकी बीवी की कर्कशता चली जाएगी। लाल रंग की गिलहरी को बूंदी का रायता खिलाएं

वृष 31 दिसम्बर की शाम पतले होने का जो resolution आपने लिया था, वो दो जनवरी की सुबह आलू के परांठे खाने के साथ टूट जाएगा। तीन जनवरी की शाम दोस्त के साथ टहलते हुए आप उसके कहने पर मोमो खा लेंगे। पहला मोमो मुंह मे लेते ही पतले होने का आपका resolution आपको धिक्कारेगा मगर उसे इग्नोर कर आप एक और प्लेट का ऑर्डर देंगे। दस जनवरी की शाम बीवी आपको बताएगी कि रनिंग के लिए आपने जो नया ट्रैक सूट खरीदा था, बिना एक बार भी पहने उसे चूहा काट गया है। बीवी पर लापरवाही का इल्ज़ाम लगाते हुए आप उससे झगड़ा करेंगे, जिस पर बीवी के हाथों आपकी उन स्पोर्ट्स शूज़ से पिटाई हो जाएगी जिन्हें आपने ट्रेक सूट के साथ खरीदा था। सलाह-किसी गरीब आदमी को रा वन और रामगोपाल वर्मा की आग की डीवीडी भेंट करें, उसे देखने के बाद वो आपको इतनी बद्दुआएँ देगा कि आप खुद-ब-खुद पतले हो जाएँगे।

मिथुन बाकी सालों की तरह इस साल भी आप कुछ ख़ास नहीं उखाड़ पाएंगे। ऑफिस में आपको बॉस से डांट खानी पड़ेगी और घर पर बीवी से। न तो रिश्तेदार आपको भाव देंगे और न ही मांगने पर बच्चे पानी का गिलास। जून आते-आते आपका पालतू कुत्ता भी आपको देखकर पूंछ हिलाना बंद कर देगा। इस सबसे तंग आकर आप आत्महत्या करना चाहेंगे और जान देने के लिए एक दिन टीवी पर मौसमकी डीवीडी लगाएंगे। मगर प्रिंट ख़राब होने के कारण वो चल नहीं पाएगी। गुस्से में आप अपने हाथ की बनी चाय पिएंगे मगर उससे भी आप मरेंगे नहीं बस मुंह से झाग निकलने के बाद बेहोश होंगे। सलाह-सात मंगलवार किसी लाल गिलहरी को बूंदी वाला रायता खिलाएं, लाभ मिलेगा।

कर्क पिछले साल की तरह ये साल भी आप फेसबुक पर बैठ कर बर्बाद कर देंगे। दूसरों की वॉल से अच्छे-अच्छे स्टेटस चोरी करने, उन स्टेटस पर आने वाले लाइक का घंटों इंतज़ार करने, हर फोटो में दोस्तों को टैग करने, स्कूल में साथ पढ़ी लड़कियों के प्रोफाइल ढूंढने और एक्सेप्ट न किए जाने की उम्मीद के बावजूद उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने में आप अपनी ज़िंदगी का एक और साल तबाह कर देंगे। फेसबुक पर बैठे रहने के चक्कर में आप पूरी सर्दी बिना नहाए गुज़ार देंगे। इसी चक्कर में मां-बाप से गालियां खाएंगे मगर आप इतने ढीठ हो चुके हैं कि इन गालियों का आप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सारी गालियां एक कान से होते हुए बिना दिमाग में घुसे दूसरे कान से चुपचाप निकल जाएंगी। सलाह-आप जैसे ढीठ आदमी को सलाह देने का कोई फायदा नहीं है।

सिंह नौकरीपेशा लोगों के लिए ये साल काफी फलदायक रहेगा। सरकारी नौकरी में हैं तो दो नम्बर का पैसा बनाने का अच्छा मौका मिलेगा। प्राइवेट में हैं तो बॉस की लगातार चमचागिरी करने के चलते आपकी भारी तरक्की होगी। आपकी सैलरी बाकी लोगों से ज़्यादा बढ़ाई जाएगी। आपको ऐसे काम में लगाया जाएगा जिसके लिए न्यूनतम बुद्धि की आवश्यकता होगी। आपका काम बाकी लोगों की बॉस से चुगली करना है और वो आप पूरी ईमानदारी से करते रहें। गणेशा सलाह देते हैं कि जून के बाद आप थोड़ा सतर्क हो जाएं क्योंकि इस दौरान बॉस का एक और सिफारिशी टट्टू ऑफिस में ज्वॉइन करेगा। तब आपको नए सिरे से खुद को प्रूव करना होगा। मगर घबराएं नहीं, खुद पर विश्वास रखें। हर आदमी के पास गिफ्टिड टेलेंट होता है। बॉस के सामने दूसरों की चुगली करने के लिए नए आदमी को एफर्ट करना होगा जबकि ऐसा करने का आपमें पैदाइशी गुण है। सलाह- लगाई-बुझाईकी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए रोज़ाना तीन हिंदी सीरियल देखें।

कन्या आपकी राशि भले ही कन्या हो मगर आपकी ज़िंदगी में कोई कन्या आती दिखाई नहीं दे रही। मगर इसमें किसी का कोई कसूर नहीं है, सिवाए आपके। करियर सेट करने की उम्र में आप लड़कियां सेट करते रहे और जब बारी लड़की सेट करने की आई तो आप करियर सेट करने में लगे हैं। आपकी अरेंज मैरिज हो सके ऐसी आपकी इमेज नहीं है और आप लव मैरिज कर सकें, ऐसी आपकी शक्ल नहीं। गणेशा कहते हैं कि ये स्थिति अभी कुछ और वक्त तक बनी रहेगी और 2017 के बाद जाकर आपका विवाह होगा मगर तब भी कन्या मनुष्य जाति से होगी या नहीं, इसकी गारंटी गणेशा नहीं लेते। सलाह-इक्कीस सोमवार सुबह-शाम खुद को दस-दस थप्पड़ लगाएं, इससे उन लड़कियों के मन को शांति मिलेगी जो कभी आपको पीटना चाहती थीं।

तुला वक्त आ गया है कि तुला राशि वाले अपनेआप को लेकर ग़लतफहमी पालना बंद कर दें और थोड़ा व्यावहारिक हो जाएं। सिर्फ आपके ये मानने से कि मैं बहुत होशियार हूं और ज़िंदगी में बहुत अच्छा डिज़र्व करता हूं, दुनिया को घंटा फर्क नहीं पड़ता। टीवी डिस्कशन्स में आने वाले गेस्ट को मूर्ख मानने से आप खुद होशियार नहीं हो जाते। दसवीं पास दोस्तों को अपने अल्पज्ञान से आतंकित करने से कुछ पल्ले नहीं पड़ने वाला। अब भी वक्त है, संभल जाइए। आपके दोस्तों के दो-दो बच्चे हो गए और आपकी अभी शादी तक नहीं हुई, ये बात अलग है कि बच्चे आपके भी दो हो चुके हैं जिनमें से एक की तो खुद आपको भी जानकारी नहीं है। सलाह- खुद के कमाए पैसों से एक अंडरवियर खरीदने बाज़ार जाएं, अपनेआप अक्ल ठिकाने आ जाएगी। दही में तीन चम्मच चाय पत्ती मिलाकर पंडित जी को पिलाएँ

वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों का इस साल भाग्य खूब साथ देगा। खरीदारी करने बाज़ार जाएंगे तो सेल में कुछ सस्ते स्वेटर मिल जाएंगे, बुक करवाने के दो दिन बाद सिलेंडर की डिलिवरी हो जाएगी, फुटपाथ से खरीदी पाइरेटिड सीडी का प्रिंट अच्छा निकलेगा, आटे की थैली में साबुनदानी का मुफ्त स्टैंड निकलेगा, जिस गाड़ी में सफर करेंगे उसमें सुंदर लड़कियां दिखेंगी, पड़ौसी मंगलू के दसवीं में अच्छे नम्बर आएंगे, उसकी बुआ की लड़की अपने मायके से आपके लिए नया पजामा लाएगी और और तो और आपकी भैंस माया भी इस साल बाकी सालों के मुकाबले ज़्यादा दूध देगी। सलाह-अपनी गली के आठ आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाएं, इससे आपका भाग्य और चमकेगा।

धनु धनु राशि वालों की किस्मत इस साल बिलुकल साथ नहीं देगी। ऑफिस जाने की जल्दी होगी तो रास्ते में स्कूटर पंचर हो जाएगा, मेहमान आए होंगे तो सिलेंडर ख़त्म हो जाएगा, ज़रूरत पड़ेगी तो नेट काम नहीं करेगा, बीवी बीमार होगी तो कामवाली छुट्टी ले लेगी, सहवाग की बैटिंग के वक्त लाइट चली जाएगी, लाइट आने पर मिमोह चक्रवर्ती की फिल्म चल रही होगी और तो और जब-जब चाय में डुबोकर खाने के लिए ग्लूकोज़ का बिस्किट उसके अंदर डालेंगे, वो उसी में डूब जाएगा! सलाह- बिस्किट चाय में न डूबे इसके लिए ज़रूरी है कि उसे लाइफ जैकेट पहनाएं।

मकर टीवी देखने के लिहाज़ से ये साल महिलाओं के लिए काफी अच्छा है। मार्च के आसपास आप सोनी टीवी पर दो नए सीरियल देखने शुरू करेंगी और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर बिना नागा उसे पूरा साल देखेंगी। इस दौरान रिमोट के लिए कई दफा आपका अपने पति से झगड़ा होगा मगर सीरियल्स की साजिश रचने वाली बहुओं की तरह आप भी हार नहीं मानेंगी। वहीं दूसरी ओर रिएलिटी शोज़ के हिसाब से ये साल आपके लिए उतना अच्छा नहीं है। आप जिस-जिस कंटेस्टेंट को सपोर्ट करेंगी वो फाइनल तक तो पहुंचेगा मगर जीत नहीं पाएगा जिसे लेकर आपको भारी दुख होगा। रात-रात भर कमरा बंद कर फूल की कढ़ाई वाला तकिया मुंह में ले रोएंगी और हो सकता है इस बीच डिप्रेशन की शिकार भी हो जाएं। सलाह- पति के सोते ही उसके मोबाइल से अपने चहेते प्रतिभागी को ढेरों वोट करें। इससे पति भले ही डेंजर ज़ोन में चला जाए, मगर आपका पसंदीदा गवैया बच जाएगा।

कुंभ कुंभ राशि वाले अपना ये साल पंडितों के चक्कर में बर्बाद कर देंगे। आपके लिए ये समझना बहुत ज़रूरी है कि अगर आपकी ज़िंदगी में कुछ नया नहीं हो रहा तो उसकी वजह आपकी ख़राब किस्मत नहीं, आपका आलस हैं। ऑफिस से घर आने के बाद आपका सारा दिन पड़े रहने में बीतता है और यही वजह है कि आप दस साल से एक ही ऑफिस में पड़े हुए हैं। आपके पड़े-पड़े आपके बच्चे बड़े हो गए मगर आप अपने करियर में कहीं नहीं बढ़े। गणेशा सलाह देते हैं कि यूं दिनभर भेजे के कुकर में ख्याली पुलाव पकाते रहने और बॉस के घर की महिला सदस्यों को याद कर उसे गाली देने का कोई फायदा नहीं है। लिहाज़ा बिना कुछ किए हालात सुधरने की उम्मीद में चार अख़बारों में राशियां पढ़ने और हाथ की अंगुलियों से लेकर पैर के अंगूठे तक में अंगूठियां पहनने के बजाए रजाई से निकलिएगैस पर पानी गर्म कर नहाइए, नहीं नहाना तो मुंह-हाथ ही धोइए और स्कूटर स्टार्ट कर कहीं बाहर जाइए। सलाह- एक पाव दही में तीन चम्मच चाय पत्ती डालने के साथ उसमें रात की बची एक कटोरी दाल डालिए और इसमें आधा गिलास फिनाइल मिक्स कर, उस पंडित को पिलाइए जो खुद आपको अब तक ऐसे उल्टे-सीधे उपाय बताता आ रहा था।

मीन जहां तक बारगेनिंग या मोलभाव का सवाल है, मीन राशि की महिलाओं के लिए ये साल काफी शुभ हैं। दुकान से सूट का कपड़ा खरीदने से लेकर गली में सब्ज़ी वाले से लड़-झगड़कर पैसे कम करवाने में आपको व्यापक सफलता मिलेगी। आपकी ख्याति मौहल्ले में ही नहीं, देशभर में फैलेगी। और तो और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हथियार खरीदते समय भारत सरकार दूसरे देशों से मोलभाव के लिए आपको बुलावा भेजेगी। फ्रांस जैसे देशों से मिसाइल खरीद के समय आप ये कहते हुए रेट कम करवाएंगीजाओ भइया जाओपचास में पीछे जापान वाले दे ही रहे थे या फिर हम तो हमेशा आप ही के यहां से खरीदते हैं’, कहकर उन्हें इमोशनली ब्लैकमेल करेंगी। सलाह- कॉलेज में आप भाव खाती रही हैं और अब मोलभाव कर रही हैं। हमारी गुज़ारिश है कि यही हाव-भाव बनाए रखें।


Recently a movie was released with the name of “Pyaar ka Panchnama”. There is a dialouge in the movie which aptly describes the condition of boys who are in a relationship with girls and how girls manipulate them.

On similar lines, I found a very interesting dialouge somewhere on the net which aptly describes the plight of a Software Engineer, who is used, manipulated, harassed by the manager. It is termed as “Manager ka Panchnama”

The following is a monologue of a frustrated Software Engineer:

Problem,problem ye hai ki wo manager hai aur ,mein resource,
Problem ye hai ki mein chahta tu ki meri life mein koi problem hi na ho,
Lekin agar meri life mein koi problem na ho to ye uski life sabse badi problem hai.

Bull shit he is worried yaar, use to celebrate karna chahiye, because it happens exactly what he wants,
Kasam se yaar is 6 mahine mein I had it all sab dekh liya maine,
Abe kaun sa job, kaisa project, kahe ka increament,
Job ka matlab hi hota hai end of ur own happiness,
Iske baad all u worried about is deployment, late night work,increament,client calls.
Shaam ka dalta suraj jo phale hum bhi kabhi dekhte the,
In managers ko na koi khush nahi rakh sakta , a happy manager is a myth.
Sab saala na bahar lage bade bade hoardings ka dosh hai,
4 years engg. badi si degree and then job kahani khatam,
Uske baad ki kahani koi nahi batata, Iske baad ki kahani mein batata hu,
Iske baad banda do ghante late aaya to problem,
Late night na ruka to problem.
Saala demands nd expectation kahatam nahi hoti inki,
ek to jo high priorty task hota hai na wo nahi batayenge,
2 week dimaag chatenge document banao document banao,
aur fir jab document bana ke do to 2 sadi si line ka mail lekhenge ,
we’ll discuss in call,
aur fir agle do hafte dimaag khayenge Document doucment.
Saala kaam kar raha hu beech mein mail aa jata hai "Look into this also",
Mail ka reply deta hu sir abhi busy hu baad mein dekh lunga,
then again mail do the same first, ek baar isko dekh lo,
1 baar dekh bhi lunga to tujhe kya mil jayega mere baap, theek se to kar paunga nahi.
Sabse jyada dimaag ki dahi to in bina resource wale project ne ki hai,gale ka patta hai saala,
Naye, purane, Band hone wale saare projects, resource wo hi 2,
are kaam jayada aa jane se ghante thodi na bad jate hai 1 din mein,
Fir iska jawab in managers ko bhi do, i think u r not intrested in project,
Why I choose u in this project, are mujhe kya pata ki why u choose me?,
abe jab samajh mein aa hi raha to phir release kyun nahi kar dete.
Saala pata nahi kaam kya karte hai ye manager Do mail reply mat kar,
urgent extn par call aayega,
Ab pata chala ye software engineer ki aise halat kyun hoti hai,
Aur ye adminstrative job wale bande itne happy kyun hote hai ,
because they don’t have a manager to screw that happiness.
Saala kaam kar raha hu koi Pool to khel nahi raha phir bhi seat par aa aakar,
poochenge What r u doing..?,
Iske baad jaane se pahle inhe apna DSR (Daily Status Report) bhejo tab ghar jao,
Kuch achcha implement karne se phale 50 baar inse poocho,approvation lo,
Aur agar kabhi thoda rest mil bhi jaye to again same question what r u doing…?,
Are kuch nahi kar raha mere baap ye soch raha hu tujhe yahan se kaise bhagau.
Mein tujhe bata raha hu u never discuss anything with ur manager,
Because every discussion with a manager is an argument,
Aur bhai argument mein inse koi nahi jeet sakta,
because we are busy unke pass to koi kaam hai nahi aur senior persons hai,
to argument mein wo kaise haar man le.
Wo saala pure database delete mar de to koi dikaat nahi,
Lekin tum galti se 1 table delete kar do to aasman toot jayega…!!!

@@@@@@@Kuch nahi ho sakta in Sofware engineers ka bhai@@@@@@@


I stumbled upon this article which was showcased at my friends FB profile and couldn’t help myself from posting this on my blog. I hope you will also enjoy this as much as I did.
Like the old Chinese saying goes, “Sometimes, a beaver is just a squirrel with big teeth.” Don’t ask me which Chinese person actually said that because there are a lot of them and i can’t be bothered to provide every single detail. The event that reminded me of this popular Chinese rodent-canine maxim was a seemingly innocuous outing to the movie theatre. I saw a flick that had advertised itself as a comedy thriller but turned out to be one that belongs to a niche genre that i often refer to as ‘equestrian excreta’.

On one Tuesday that felt a lot like a Thursday, i stumbled upon the answer to one of life’s biggest philosophical conundrums. No, not the ‘Is Bruce Lee still alive?’ question but the other one which is, ‘What’s going on with the movie world?’ And the answer to that is that every movie, despite its nationality and language, is actually the same. I’m well accustomed to three movie industries: Hollywood, Bollywood and Zollywood (that’s the collective name i’ve given for south Indian movies) and i’m going to try and explain here what the differences and similarities of these three ‘woods’ are.

When it comes to the Hollywood hero, he has impeccable looks; is self-made and well-to-do but not super-rich; finds the time to come up with hilarious one-liners even in the middle of dangerous crises; is often the only man in the world who can save the world. The Bollywood hero is fair-skinned; has a rich father who doesn’t hug him enough; craves true love and has no interest in the dozens of super-hot ladies throwing themselves at him; has no problem crying uncontrollably when delivering moving dialogues; is capable of fighting off at least 8-10 villains single-handedly. The Zollywood hero is above retirement age but still in his 30s; a misunderstood thug with a heart of gold; has a secret tragic family background (revealed only to the heroine) with one bed-ridden father, one paraplegic brother, two nubile sisters and one mother who cries at the drop of a coin; can jump over buildings; can punch police officers right in the mouth and get away with it; is capable of fighting at least 45-48 villains single-handedly.

As for heroines, the Hollywood variety is drop-dead gorgeous but still can’t find a guy or a job; has totally unattractive best friends; keeps picking fights with the hero throughout the movie but realises she loves him 10 minutes before the movie ends; has impromptu make-out sessions with the hero mostly after arguments. The Bollywood heroine is drop-dead gorgeous and as kind as Mother Teresa; has an abusive fiance who makes her realise how great the hero is; is extremely innocent but does at least one steamy song where she tries to seduce the hero but he keeps walking away. And the Zollywood heroine is portrayed by an actress barely out of school; doesn’t seem to mind that her grandfather is a few years younger to the hero; is rich and posh but falls for the thug; has a demonic power-hungry father; is extremely innocent but has at least three songs where she tries to explicitly seduce the hero but he keeps walking away.

The Hollywood villain is scorned by society, turned evil for a reason but has a brilliant mind and is just as good-looking as the hero while the Bollywood villain wears a tuxedo, has terribly bad aim when it comes to shooting and has the hots for the heroine. And the Zollywood type has a thick beard, is a rival thug or a high-profile politician and is often played by an unsuccessful Bollywood actor.

The Hollywood story? The girl and the world are in danger. The Bollywood story is that the girl is in danger, and as for Zollywood, the girl and south Indian commoners are in danger.

Read more: Same old story – Edit Page – Opinion – Home – The Times of India http://timesofindia.indiatimes.com/home/opinion/edit-page/Same-old-story/articleshow/6500802.cms#ixzz0yoJDFbc2


I stumbled upon these funny yet very very relevant graphical depiction of some of the most interesting scenarios that may happen in one’s life.

Have a look…

Hope you liked the graphs of life…

Do tell about your experiences in the comment space…

If you need more like this, visit http://www.graphjam.com


3:00 AM, 11 Jun 2010.

insomnia Well great. It’s 3:00 in the morning and here I am scribbling and ranting about my insomniac stage that too live and uncut version. For the lack of siesta and sleep the yester day & night, I slept in the evening after coming back from office. Now at the odd hour of 2:00 I just woke up with my stomach gluttonous craving and finds nothing but some milk so I had a pre-session breakfast of tea and rusk just now and the after effects as you can see is am awake fully, in all my senses. The good thing is it’s raining cats and dogs outside, which by the way compels me to mention two points:

1. When it’s raining water drops, why we say it’s raining cats and dogs. (Ofcourse, I have heard of the story of falling cats from roof, when it rains. But that doesn’t makes sense.) If someone knows, please do tell me about it.

2. Ofcourse, its raining outside and not inside. (Preassumtion: I don’t live in a house with leaking roof  or the great epidemic of mumbai slums. Don’t get me wrong here when I gave a analogy. It’s just that I have seen it and it does feel like a epidemic.)

So will it not be suffice to say that it’s raining…it’s raining heavily…no cats and dogs…as they are hiding under a shelter. give them a break for their life. ahh…what a rant…

insomnia_2

3:15 AM, 11 Jun 2010.

Am hungry and pissed off by the fact that its friday today, so I’ve to go to the office and am fretting by the fact that I will need a siesta again, lack of which causes my small already dying brain to function even less than it does normally. So it’s not going to be an effective day today, I know that and it worries me.

One of the other things that’s helping me in making my life burnt in core of the hell is the impotent HR department and the ever feasting gourmand monkeys sitting on top of me and giving me a hell of a time. Ahhhhh…I remember Boman Irani in Munna bhai MBBS during my hard times…laugh…laugh…and laugh more in times of distress, in direct proportion to your worries and anger. It will cure you, curb you. Well, unfortunately at this point of time i can’t do it right. So there’s a better way…write…write…and write more in times of distress, in direct proportion to your worries and anger. It will help you vent out your anger and anguish and you’ll be a happier person ever after…there after (stupid fellow…ever after is in stories only, no ever after exist in real world. Take the red pill otherwise and go back to matrix, big jaw.) Ahhh…another rant and am already feeling sleepy…and a sudden yawn shows me the good sign of my changing state. It works…see I told you…writing works…and there goes a second yawn…too frequent…something’s wrong with this yawning. I think this is not because I’m feeling sleepy. It is because I’m feeling bored.

insomnia cartoon chruch.com

3:30 AM, 11 Jun 2010.

Sitting at the window side, watching the rain feels refreshing though, but silent loneliness creeps in and making me sad. I need a vacation…mom, dad am coming home. It’s been a while I haven’t seen you, embrace you, cuddled you.

Ok…Let’s try something different. Thinking of something good…that kindles a spark in me or something that tickles me. Hmmmmmmmmmmmmmm (pause) hmmmmmm…gosh…pathetic it is more that it seems…think..think…you dic*****d…hmmmmmm…ahh there it is…two new smartphones have registered there entry recently and they both are good, I must say. Dell Streak and Apple’s iPhone 4, are something that will change the way we think about phones. They are a revolution and they are reloaded. I must but one of them…I will…yes…Ofcourse…this time it’s a definite yes…after a long wait of over a year, there’s something that meets my unnecessary requirements.

Good…it worked…although I’m not yawning…neither am feeling sleepy but am certainly feeling good…now I’m able to look at the rain in a different light. I can see the light…I feel light…am happy…and calm… and poised.

3:40 AM, 11 Jun 2010.

My laptop’s battery is showing me a decline of 45%, that means it’s time for me to stop as after 40 minutes of rambling and ranting am a bit tired now, and being a lazy person that I am, just by the thought of being tired am finally feeling sleepy. This time it’s a genuine feeling…no yawning no boredom…only falling asleep…so as others fall in love…it’s time for me to re-fall in sleep.

insomnia2

Bye Bye…to all who managed to read through this and survived to come to this point where you are thinking what it was all about. Well nothing…it was just a rant as I declared earlier…I did declare it…huh…lemme check once…ahh hhhh yes I wrote at the starting…and btw what else would you expect from an insomnia tale…it’s not Arabian Nights tale dude…

Yaaawwwwwwnnnnnnnnnnnnnnn………am going to sleep…you for the time look out for my other post that are less futile that this and they might add some more to your grey matter…Happy reading…

4:00 AM, 11 JUN 2010

After editing the pics and final posting.


All of you who have seen the movie ‘Wednesday’… will love these rephrased Naseerudin Shah Dialogue’s…

Project Manager Rathore : कौन हो तुम..??? क्या पहचान है तुम्हारी ?

Unkonwn Caller : कौन हूँ मैं…मैं वो हूँ जो आज committment करने से डरता है, मैं वो हूँ जो आज घर जाने से डरता है, ये सोच के की कहीं घर वाले पहचानने से इंकार ना कर दे…

मैं वो हूँ जो आज job change करता है तो सोचता है की कहीं recession में मुझे कंपनी से ना निकाल दे…

मैं वो हूँ जिसकी बीवी उससे friday को दस बार फ़ोन करती है, “क्या कर रहे हो…?? काम ज्यादा है…?? थक गए हो…?? ”

मेरा हाल पूछने के लिए या काम पूछने के लिए नहीं, राठौर साब…

बल्कि वो ये जानना चाहती है की… कहीं हमेशा की तरह एंड मोमेंट पे बॉस के बुलाने पे मैं saturday को भी ऑफिस तो नहीं जा रहा…

मैं वो हूँ जो breakfast के टाइम पे डिनर करता है, लंच टाइम पे breakfast करता है, डिनर के टाइम पे लंच करता है… वो भी टाइम मिल जाए तो…

मैं वो हूँ जो अक्सर फसता  है
कभी Interviews के सवाल मे फसता है , कभी बड़ी कंपनियों के जाल में  फसता है, कभी बॉस और client के बवाल मे फसता है…

Walk-In की भीड़ तो देखी होगी आपने राठौर साब… उस भीड़ में से कोई भी चेहरा चुन लीजिए.. मैं वो हूँ…
I’m the…..STUPID SOFTWARE ENGINEER….


Whenever you ask people visiting your home, “kya loge?”

The usual reply has always been “Kuchh Nahi”.

Finally I have found “Kuchh Nahi”, so feel free to serve your friends whenever they say “Kuchh Nahi Lenge”

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Here’ the link to their website: www.kuchhnai.com