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राशिफल 2012

मेष इस साल आपका विवाह योग बन रहा है मगर ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आप पहले से शादीशुदा हैं। गणेशा कहते हैं कि इस आफत के लिए आप खुद ज़िम्मेदार हैं। टाइमपास करने के चक्कर में ऑफिस में जिस लड़की से आपने फ्लर्ट करना शुरू किया था, उसे लेकर आप अब सीरियस होने लगे हैं। आपके प्यार में वो लड़की भी इतन…ा आगे जा चुकी है कि आपका तलाक तक करवा सकती है वैसे भी वो घर उजाड़ने के मिशन पर निकली है। जब-जब आप ऑफिस में होते हैं तो बीवी को धोखा देने के लिए मन में गिल्ट होता है मगर घर पहुंचते ही बीवी की कर्कश आवाज़ सुन, आप सोचते हैं कि ये यही डिज़र्व करती है। बावजूद इसके गणेशा सलाह देंगे कि इन चक्करों में मत पड़िए। ये उम्र आपकी सैटिंग करने की नहीं, कन्यादान करने की है। ज़रा नज़र उठाकर देखिए, आपकी बेटी जवान हो गई है। सलाह-पांच शनिवार छह कौओं को शहद चटाइए, इससे आपकी बीवी की कर्कशता चली जाएगी। लाल रंग की गिलहरी को बूंदी का रायता खिलाएं

वृष 31 दिसम्बर की शाम पतले होने का जो resolution आपने लिया था, वो दो जनवरी की सुबह आलू के परांठे खाने के साथ टूट जाएगा। तीन जनवरी की शाम दोस्त के साथ टहलते हुए आप उसके कहने पर मोमो खा लेंगे। पहला मोमो मुंह मे लेते ही पतले होने का आपका resolution आपको धिक्कारेगा मगर उसे इग्नोर कर आप एक और प्लेट का ऑर्डर देंगे। दस जनवरी की शाम बीवी आपको बताएगी कि रनिंग के लिए आपने जो नया ट्रैक सूट खरीदा था, बिना एक बार भी पहने उसे चूहा काट गया है। बीवी पर लापरवाही का इल्ज़ाम लगाते हुए आप उससे झगड़ा करेंगे, जिस पर बीवी के हाथों आपकी उन स्पोर्ट्स शूज़ से पिटाई हो जाएगी जिन्हें आपने ट्रेक सूट के साथ खरीदा था। सलाह-किसी गरीब आदमी को रा वन और रामगोपाल वर्मा की आग की डीवीडी भेंट करें, उसे देखने के बाद वो आपको इतनी बद्दुआएँ देगा कि आप खुद-ब-खुद पतले हो जाएँगे।

मिथुन बाकी सालों की तरह इस साल भी आप कुछ ख़ास नहीं उखाड़ पाएंगे। ऑफिस में आपको बॉस से डांट खानी पड़ेगी और घर पर बीवी से। न तो रिश्तेदार आपको भाव देंगे और न ही मांगने पर बच्चे पानी का गिलास। जून आते-आते आपका पालतू कुत्ता भी आपको देखकर पूंछ हिलाना बंद कर देगा। इस सबसे तंग आकर आप आत्महत्या करना चाहेंगे और जान देने के लिए एक दिन टीवी पर मौसमकी डीवीडी लगाएंगे। मगर प्रिंट ख़राब होने के कारण वो चल नहीं पाएगी। गुस्से में आप अपने हाथ की बनी चाय पिएंगे मगर उससे भी आप मरेंगे नहीं बस मुंह से झाग निकलने के बाद बेहोश होंगे। सलाह-सात मंगलवार किसी लाल गिलहरी को बूंदी वाला रायता खिलाएं, लाभ मिलेगा।

कर्क पिछले साल की तरह ये साल भी आप फेसबुक पर बैठ कर बर्बाद कर देंगे। दूसरों की वॉल से अच्छे-अच्छे स्टेटस चोरी करने, उन स्टेटस पर आने वाले लाइक का घंटों इंतज़ार करने, हर फोटो में दोस्तों को टैग करने, स्कूल में साथ पढ़ी लड़कियों के प्रोफाइल ढूंढने और एक्सेप्ट न किए जाने की उम्मीद के बावजूद उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने में आप अपनी ज़िंदगी का एक और साल तबाह कर देंगे। फेसबुक पर बैठे रहने के चक्कर में आप पूरी सर्दी बिना नहाए गुज़ार देंगे। इसी चक्कर में मां-बाप से गालियां खाएंगे मगर आप इतने ढीठ हो चुके हैं कि इन गालियों का आप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सारी गालियां एक कान से होते हुए बिना दिमाग में घुसे दूसरे कान से चुपचाप निकल जाएंगी। सलाह-आप जैसे ढीठ आदमी को सलाह देने का कोई फायदा नहीं है।

सिंह नौकरीपेशा लोगों के लिए ये साल काफी फलदायक रहेगा। सरकारी नौकरी में हैं तो दो नम्बर का पैसा बनाने का अच्छा मौका मिलेगा। प्राइवेट में हैं तो बॉस की लगातार चमचागिरी करने के चलते आपकी भारी तरक्की होगी। आपकी सैलरी बाकी लोगों से ज़्यादा बढ़ाई जाएगी। आपको ऐसे काम में लगाया जाएगा जिसके लिए न्यूनतम बुद्धि की आवश्यकता होगी। आपका काम बाकी लोगों की बॉस से चुगली करना है और वो आप पूरी ईमानदारी से करते रहें। गणेशा सलाह देते हैं कि जून के बाद आप थोड़ा सतर्क हो जाएं क्योंकि इस दौरान बॉस का एक और सिफारिशी टट्टू ऑफिस में ज्वॉइन करेगा। तब आपको नए सिरे से खुद को प्रूव करना होगा। मगर घबराएं नहीं, खुद पर विश्वास रखें। हर आदमी के पास गिफ्टिड टेलेंट होता है। बॉस के सामने दूसरों की चुगली करने के लिए नए आदमी को एफर्ट करना होगा जबकि ऐसा करने का आपमें पैदाइशी गुण है। सलाह- लगाई-बुझाईकी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए रोज़ाना तीन हिंदी सीरियल देखें।

कन्या आपकी राशि भले ही कन्या हो मगर आपकी ज़िंदगी में कोई कन्या आती दिखाई नहीं दे रही। मगर इसमें किसी का कोई कसूर नहीं है, सिवाए आपके। करियर सेट करने की उम्र में आप लड़कियां सेट करते रहे और जब बारी लड़की सेट करने की आई तो आप करियर सेट करने में लगे हैं। आपकी अरेंज मैरिज हो सके ऐसी आपकी इमेज नहीं है और आप लव मैरिज कर सकें, ऐसी आपकी शक्ल नहीं। गणेशा कहते हैं कि ये स्थिति अभी कुछ और वक्त तक बनी रहेगी और 2017 के बाद जाकर आपका विवाह होगा मगर तब भी कन्या मनुष्य जाति से होगी या नहीं, इसकी गारंटी गणेशा नहीं लेते। सलाह-इक्कीस सोमवार सुबह-शाम खुद को दस-दस थप्पड़ लगाएं, इससे उन लड़कियों के मन को शांति मिलेगी जो कभी आपको पीटना चाहती थीं।

तुला वक्त आ गया है कि तुला राशि वाले अपनेआप को लेकर ग़लतफहमी पालना बंद कर दें और थोड़ा व्यावहारिक हो जाएं। सिर्फ आपके ये मानने से कि मैं बहुत होशियार हूं और ज़िंदगी में बहुत अच्छा डिज़र्व करता हूं, दुनिया को घंटा फर्क नहीं पड़ता। टीवी डिस्कशन्स में आने वाले गेस्ट को मूर्ख मानने से आप खुद होशियार नहीं हो जाते। दसवीं पास दोस्तों को अपने अल्पज्ञान से आतंकित करने से कुछ पल्ले नहीं पड़ने वाला। अब भी वक्त है, संभल जाइए। आपके दोस्तों के दो-दो बच्चे हो गए और आपकी अभी शादी तक नहीं हुई, ये बात अलग है कि बच्चे आपके भी दो हो चुके हैं जिनमें से एक की तो खुद आपको भी जानकारी नहीं है। सलाह- खुद के कमाए पैसों से एक अंडरवियर खरीदने बाज़ार जाएं, अपनेआप अक्ल ठिकाने आ जाएगी। दही में तीन चम्मच चाय पत्ती मिलाकर पंडित जी को पिलाएँ

वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों का इस साल भाग्य खूब साथ देगा। खरीदारी करने बाज़ार जाएंगे तो सेल में कुछ सस्ते स्वेटर मिल जाएंगे, बुक करवाने के दो दिन बाद सिलेंडर की डिलिवरी हो जाएगी, फुटपाथ से खरीदी पाइरेटिड सीडी का प्रिंट अच्छा निकलेगा, आटे की थैली में साबुनदानी का मुफ्त स्टैंड निकलेगा, जिस गाड़ी में सफर करेंगे उसमें सुंदर लड़कियां दिखेंगी, पड़ौसी मंगलू के दसवीं में अच्छे नम्बर आएंगे, उसकी बुआ की लड़की अपने मायके से आपके लिए नया पजामा लाएगी और और तो और आपकी भैंस माया भी इस साल बाकी सालों के मुकाबले ज़्यादा दूध देगी। सलाह-अपनी गली के आठ आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाएं, इससे आपका भाग्य और चमकेगा।

धनु धनु राशि वालों की किस्मत इस साल बिलुकल साथ नहीं देगी। ऑफिस जाने की जल्दी होगी तो रास्ते में स्कूटर पंचर हो जाएगा, मेहमान आए होंगे तो सिलेंडर ख़त्म हो जाएगा, ज़रूरत पड़ेगी तो नेट काम नहीं करेगा, बीवी बीमार होगी तो कामवाली छुट्टी ले लेगी, सहवाग की बैटिंग के वक्त लाइट चली जाएगी, लाइट आने पर मिमोह चक्रवर्ती की फिल्म चल रही होगी और तो और जब-जब चाय में डुबोकर खाने के लिए ग्लूकोज़ का बिस्किट उसके अंदर डालेंगे, वो उसी में डूब जाएगा! सलाह- बिस्किट चाय में न डूबे इसके लिए ज़रूरी है कि उसे लाइफ जैकेट पहनाएं।

मकर टीवी देखने के लिहाज़ से ये साल महिलाओं के लिए काफी अच्छा है। मार्च के आसपास आप सोनी टीवी पर दो नए सीरियल देखने शुरू करेंगी और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर बिना नागा उसे पूरा साल देखेंगी। इस दौरान रिमोट के लिए कई दफा आपका अपने पति से झगड़ा होगा मगर सीरियल्स की साजिश रचने वाली बहुओं की तरह आप भी हार नहीं मानेंगी। वहीं दूसरी ओर रिएलिटी शोज़ के हिसाब से ये साल आपके लिए उतना अच्छा नहीं है। आप जिस-जिस कंटेस्टेंट को सपोर्ट करेंगी वो फाइनल तक तो पहुंचेगा मगर जीत नहीं पाएगा जिसे लेकर आपको भारी दुख होगा। रात-रात भर कमरा बंद कर फूल की कढ़ाई वाला तकिया मुंह में ले रोएंगी और हो सकता है इस बीच डिप्रेशन की शिकार भी हो जाएं। सलाह- पति के सोते ही उसके मोबाइल से अपने चहेते प्रतिभागी को ढेरों वोट करें। इससे पति भले ही डेंजर ज़ोन में चला जाए, मगर आपका पसंदीदा गवैया बच जाएगा।

कुंभ कुंभ राशि वाले अपना ये साल पंडितों के चक्कर में बर्बाद कर देंगे। आपके लिए ये समझना बहुत ज़रूरी है कि अगर आपकी ज़िंदगी में कुछ नया नहीं हो रहा तो उसकी वजह आपकी ख़राब किस्मत नहीं, आपका आलस हैं। ऑफिस से घर आने के बाद आपका सारा दिन पड़े रहने में बीतता है और यही वजह है कि आप दस साल से एक ही ऑफिस में पड़े हुए हैं। आपके पड़े-पड़े आपके बच्चे बड़े हो गए मगर आप अपने करियर में कहीं नहीं बढ़े। गणेशा सलाह देते हैं कि यूं दिनभर भेजे के कुकर में ख्याली पुलाव पकाते रहने और बॉस के घर की महिला सदस्यों को याद कर उसे गाली देने का कोई फायदा नहीं है। लिहाज़ा बिना कुछ किए हालात सुधरने की उम्मीद में चार अख़बारों में राशियां पढ़ने और हाथ की अंगुलियों से लेकर पैर के अंगूठे तक में अंगूठियां पहनने के बजाए रजाई से निकलिएगैस पर पानी गर्म कर नहाइए, नहीं नहाना तो मुंह-हाथ ही धोइए और स्कूटर स्टार्ट कर कहीं बाहर जाइए। सलाह- एक पाव दही में तीन चम्मच चाय पत्ती डालने के साथ उसमें रात की बची एक कटोरी दाल डालिए और इसमें आधा गिलास फिनाइल मिक्स कर, उस पंडित को पिलाइए जो खुद आपको अब तक ऐसे उल्टे-सीधे उपाय बताता आ रहा था।

मीन जहां तक बारगेनिंग या मोलभाव का सवाल है, मीन राशि की महिलाओं के लिए ये साल काफी शुभ हैं। दुकान से सूट का कपड़ा खरीदने से लेकर गली में सब्ज़ी वाले से लड़-झगड़कर पैसे कम करवाने में आपको व्यापक सफलता मिलेगी। आपकी ख्याति मौहल्ले में ही नहीं, देशभर में फैलेगी। और तो और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हथियार खरीदते समय भारत सरकार दूसरे देशों से मोलभाव के लिए आपको बुलावा भेजेगी। फ्रांस जैसे देशों से मिसाइल खरीद के समय आप ये कहते हुए रेट कम करवाएंगीजाओ भइया जाओपचास में पीछे जापान वाले दे ही रहे थे या फिर हम तो हमेशा आप ही के यहां से खरीदते हैं’, कहकर उन्हें इमोशनली ब्लैकमेल करेंगी। सलाह- कॉलेज में आप भाव खाती रही हैं और अब मोलभाव कर रही हैं। हमारी गुज़ारिश है कि यही हाव-भाव बनाए रखें।


As an Indian or African, you don’t need to be introduced to this name. Gandhi is not a mere name, he is a legend. He was more than a freedom fighter, he was an inspiration. Mohandas Karamchand Gandhi was a man of great stature.

But I’m not talking about the same Gandhi here. Undoubtly he was powerful by his own means and principles but there is yet another Gandhi who is more powerful than ever. Powerful than the previous one. More influencial than him. People love the new Gandhi more than they love him. He is what people want today. He is the Gandhi on Indian Currency.

The Indians have turned greedy beyond redemption. Once there was a Midas touch – a touch which turned anything and everything to gold. Now we have Greed touch – a touch which rot anything and everything we touch. We’re once in the line of budding superpowers, and we still are in the line only. 63 years have been passed since independence and we are still nascent. The only thing that grew is greed and population and corruption and chaos all around. M.K. Gandhi stirred the whole country for a purpose that is long lost and forgotten. Even at that time a lot fought for him because he inspired them towards a common goal. Today’s Gandhi attracts everybody but inspire none. We all can fought for the Gandhi even today but our motive is different today. We’ll fight for him to own him. We have an egocentric goal now.

I hear every now and then that “Gandhiji mein bahut taquat hai” meaning Gandhiji has a lot of power. But in reality this is the power of Greed and not Gandhi. All we are taught is world is moving fast and if you don’t keep abreast you’ll be left behind but nobody taught to carry the values along while travelling. The result is rotten core and glittering appearance.

8-10 years back talks were doing the round that Indians have the largest repository of young people. India was looked upon by many as an emerging leader but alas we sank our ship on our own. That young generation is aging and soon we’ll be the largest repository of old people then we’ll have nothing. We are feeding on our own people. We are acting like beasts. Our single aim is to prove the Darwins thoery of “Survival of the Fittest” which I suppose was raw and very basic instinct. But homo sapiens grew above that raw instinct and formed society and now that instinct is growing back again. Soon there will be no India left to be proud of. All there will be barren land, full of blood and gore and none of the two Gandhi will be able to help us then.


2010 year endToday is the last day of the month and also the last day of the year 2010. Going by my commitment of writing at least one article a month, I’d only 2 hours left and I was thinking about what to write? Although I had a lot of topics flashing through my head but I just didn’t got the time to pen them down and publish. Who me? 

In a nutshell, I have some good news that I embark to new heights in my career. But alas that I had to leave Mumbai Crying face which in true sense had became “Mumbai Meri Jaan” meaning Mumbai My Life, but again the good part is I have moved back to Delhi to my family. It is a great feeling. I’ve made some good friends in Mumbai which I’ll cherish till I perish. Hot smile Now after a tribute to my stay in Mumbai, coming to the main topic – The New Year Celebration.

The face of new age is so different from yesterdays. Our ways of celebration has undergone a technological and emotional shift to come to its present form. Earlier our mode of celebration was close knit family gathering, having special dinner menu prepared and served with love by our beloved Moms. After having a sumptuous meal, we all used to get a comfortable and cosy place and waited anxiously for the special New Year program to start on Door Darshan, our special moment to watch so many Actors and Actresses perform and talk and waited for them to wish us a Happy New Year. With the advent of Cable TV, Door Darshan lost its shine but our basic instinct remained the same until recent years.

In last few years, the economy and technology has taken such a giant leap that our ways of living has changed drastically. Close knit family means Nuclear family. People have less time and much lesser physical presence now. Vampire bat 

Why I am saying this? The biggest reason can be found in my article. Here I am writing articles about New Year rather than celebrating. It is not because I don’t want to but I am too absorbed now with my own life and worries that I don’t care for yet another year. I didn’t had goals earlier so a coming year was new for me. Now my New Year is shifted to Fiscal Year –> April – March. Smile with tongue out December and January doesn’t offer me much. How come it’s a New Year? My Performance review is always set till March. Freezing I now take my resolution after my appraisal is announced and not in January.

But even while I write this, I want all the free spirits to bestow their blessings upon the world and ask you to celebrate each day with same valour and vigour and be good and do good and last but not the least please don’t forget to wish your dear ones your good wishes and take blessing from your elder and give love to your youngers.

Have a Happy New Year and a prosperous life ahead.Left hugRight hug

2011_new_year_start-wide


A thought provoking article by Pritish Nandy:

What is it about us that makes us crib, crib, crib? Cribbing has become a national pastime, making us look insecure, selfish, petulant and pompous, all at the same time.

Let’s look at the Obama visit. Even before he arrived in India, and he’s the first American President to visit India in his first term, we began to boast about how the US needs India today more than India needs the US. He is coming, declared our media, because we are the economy of tomorrow and America’s the economy of yesterday. We started hyphenating ourselves with China and argued that Obama was coming to India to acknowledge the shift in power from the West to Asia. Even assuming this is true, it was perhaps not the apt time to crow about it.

Yes, Asia is today an economic powerhouse and a US-India detente could augur well for the free world. As for China, it’s bigger, tougher, richer, cleverer and far better economically placed than we are and I don’t think they like being hyphenated with us. They prefer to be hyphenated with the US. Sure, both see us as a market for their products, not because we have a huge middle class with lots of surplus money. They see us as a market because it’s easy to sell to a country where 90% of the wealth is concentrated in the hands of 10%. Deals happen much quicker in such markets and we know exactly why.

Even before Obama came into town, our pompous local politicians, including the CM who’s currently living on borrowed time, having been caught stealing land belonging to the Kargil war widows, decide to show huge outrage over being humiliated by the US. What was this humiliation? They were invited to meet Obama at a gathering organised by the US Consulate and were requested in advance to provide their identification through PAN cards and whatever ID our own Government demands of us whenever we enter an airport or any other place where security’s an issue. So our politicians and bureaucrats took huge umbrage and refused to go.

We must be the only nation which allows our VIPs to walk through airport security without being checked because their ego is so fragile it might break if they have to go through a process mandatory for the rest of us. Worse, just outside the check-in counter, there’s a long list of VIPs who can walk past security without being checked. For VIPs it’s a status symbol. For the rest of us it’s a shame that we allow certain people (the list includes Robert Vadhera, who holds no official position) to violate a security protocol that could endanger all of us. Luckily, the Americans are not a hierarchical society. Their leaders get no such special treatment. So they did what was normal. They asked for everyone’s security details.

Our leaders created such uproar that the Consulate had no option but to call it a clerical error and apologise. Apologise for what? For ensuring security for their own Head of State, the world’s most targeted leader, at a function organised by them. Luckily, the MEA was wiser and clarified that this was no affront to India and the Consulate was well within its rights to impose its own security norms at their own function. US diplomacy won, over the petulance of our petty leaders, when the Consulate head personally met them and politely apologised for a mistake which was not a mistake in the first place. You should have seen our leaders smirk.

Now we are already claiming, half way through the visit, that Obama has let India down by not naming Pakistan as a terrorist state. No Head of State goes to a country and points fingers at another. Short of blaming Pakistan for 26/11, the poor guy did everything right. He did not go to Delhi first, like others do. He landed in Mumbai, stayed at The Taj, where the tragedy took place. He met the victims, commiserated with them, talked eloquently about the courage and the resilience of Mumbai in the face of such a dastardly terrorist strike. He said all the right things. But were we happy? No. The media went on and on and on, saying Obama should have done much more, he should have nailed Pakistan.

But Obama’s not a judge. The 26/11 case is being tried in a Mumbai court. Why should Obama pre-empt the legal process? Why must Obama stand on Indian soil and blame Pakistan? If Pakistan is behind 26/11, it’s our job to teach them a lesson, not Obama’s. He has done his bit, by openly sympathising with us, supporting our war against terrorism. He has come all way, after a severe electoral drubbing, to honour an invitation. He has not once mentioned Kashmir. He has not, like earlier US Presidents, hyphenated India with Pakistan. He has broken with the past by not going to Pakistan on his India trip. He is in India and India alone. That’s the biggest statement of all. He is here as a guest, a visitor, a friend, a believer in the tenets of democracy that bind our two nations together. Let’s treat him like one.

Bitching him out will achieve nothing.

Source


2010-11-13 22.39.00A backpack (also called rucksack, knapsack, packsack, pack, or Bergan) is, in its simplest form, a cloth sack carried on one’s back and secured with two straps that go over the shoulders. (Yes, there are exceptions. Agreed.) Snail

So what brings me to the backpack today? It is my backpack. I realized today that it has become a part of me. I carry it all the time. It is one identity mark for me.

It is a multi utilitarian chest which makes me complete. It has all the sundry items whose absence doesn’t stop you from living but their presence does makes your life a better journey.

In my backpack, you’ll find at least two books. The books serve a good time travel on the busy roads of Mumbai where time is the new measurement unit of distance. (If you’ll ask someone how far a place is, probability is he will give the answer in the number of hours it will take to reach there rather than number of kilometres you need to travel.) Reading a book is in itself an exercise to sharpen your creative thinking skills, whilst you broaden your horizons. It nourishes the intellect and expands your imagination and knowledge. So it serves a dual purpose of time travel and food for mind and soul.School

Contents of my backpack

Then I carry a folder having the copy of all important documents like passport, license, etc. This comes in handy many times. Charger and earphone are next important thing that are just too difficult to ignore. With my battery guzzling Galaxy S, I need to be prepared for any instance of low battery signal. So instead of comminating myself, I prefer to carry the charger at all times. Earphone ensures an equally, round the clock availability of entertainment without disturbing the entire crowd. Then there are other sundry items like deodorant, a poly-ethylene, pen, tickets, a wrapping paper, glue etc. which can just come in handy at times.

On a regular weekend, I also carry a Short and Tees, for who knows after the hard hitting parties I may or may not head for my home. Winking smile

The objective here is not the items themselves but the subtle role they play now. I load my backpack with these items and my backpack takes the load off my life. A flight of imagination can take me anywhere and so am prepared for a harlequin journey anytime.

Sleepy smile I guess now its time to close this backpack and go to sleep because in the morning I have another engagement to attend to and my backpack is packed.


So July is about to end. Well, this wasn’t a very great month for me but the ending is going fine so “All’s well if ends well”.

So let’s start the journey of my pathetic start when the appraisals were announced and the company settled with the decisions of giving peanuts to employees as it is good for health. Well, I’m allergic to peanuts in that way. A lot more were too. But nothing happened. Then started the series of long conversations, brain storming sessions with colleagues and managers, low performance after effects, complaints from either side, promises and all that. It all lead to a dead end. Then mid way I decided to move on and still trying to move on.

Next in line is that this month my writing abilities were paralyzed and I now see around 9 articles drafted and resting in my kitty. I was too busy sorting official issues that I didn’t get time to think over. But now I’m out of the grudge mode and trying to be back on track. Parties, movies, trekking, novels – a whole lot of stuff I did in the last 15 days and am feeling good now. Although my account balance is showing a steep decline – worst over the last few months but that’s all right. There are no free lunches in this world and materialistic happiness is as important as any other spiritual stuff (I’m not a hermit for god sake, I like to enjoy.)

Next weekend am going home so that’s very good news. Also I bought a brand new Samsung Galaxy S GT-I9000 with costs a fortune but I bought it for my “feel good factor” and seriously it did have a positive effect on me. I am too eager to show my prized ownership to my family. I am writing a review on the phone with the perspective of an Indian consumer and will post it very soon once I am through with the features of the phone.

Well I guess this is it. Too much of detail is uncalled for so I’ll end it here. This post is meant to serve as filler for my oath of posting at least one article a month. I hope August will revive my spirit from the ashes. Fingers crossed.

Adieu Dear Friends.


I stumbled upon these funny yet very very relevant graphical depiction of some of the most interesting scenarios that may happen in one’s life.

Have a look…

Hope you liked the graphs of life…

Do tell about your experiences in the comment space…

If you need more like this, visit http://www.graphjam.com